गुरुत्वाकर्षण बल क्या है? | Gravity kya hai | What is gravity in Hindi
गुरुत्वाकर्षण हमारे लिए और पृथ्वी पर रहने वाले दूसरे living things के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। गुरुत्वाकर्षण के बिना हम पृथ्वी पर survive नहीं कर सकते है। हालाँकि, पृथ्वी पर गुरुत्वाकर्षण बल हर जगह समान नहीं होता है। कम द्रव्यमान (mass) वाले स्थानों की तुलना में अधिक द्रव्यमान वाले स्थानों पर gravity थोड़ा अधिक होता है। इसके अलावा अधिक mass वाली वस्तुओं का गुरुत्वाकर्षण बल अधिक होता है। तो चलिए जानते है की क्या होगा अगर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ख़त्म हो जाए तो...
गुरुत्वाकर्षण बल क्या है?
गुरुत्वाकर्षण एक बल (force) है जो की चीजों को एक दूसरे की ओर attract यानी खींचता है। गुरुत्वाकर्षण बल कि वजह से ही हम पृथ्वी की सतह (surface) पर चल और दौड़ पते हैं। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल ही हमें इसकी surface पर रखता है, और वस्तुओं को अपनी surface पर गिराता या खींचता है - जैसे की पेड़ से फल टूटने के बाद जमीन पर गिरता है। इसके अलावा गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही Earth और solar system में मौजूद बाकी planets सूर्य के चारों ओर अपनी अपनी orbit में चक्कर लगते है।
शून्य गुरुत्वाकर्षण क्या है?
शून्य गुरुत्वाकर्षण (Zero Gravity) वह स्थिति या अवस्था होती है जब आपका शरीर weightless हो जाता है। शून्य गुरुत्वाकर्षण की स्थिति में, हमारे शरीर पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल (gravitational force) शून्य हो जाता है। उस वक्त हमारा शरीर एकदम weightless हो जाता है। शरीर पर त्वरण बलों की अनुपस्थिति के कारण शून्य गुरुत्वाकर्षण में हम हवा में बड़ी आसानी से float यानी तैर सकते है। यह स्थिति बिलकुल swimming pool या water में रहने के जैसा होता है जहां हम थोड़े से प्रयास से तैरने लगते हैं।
यदि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण आधा हो जाए तो क्या होगा?
अगर पृथ्वी का gravity अभी के मुकाबले केवल आधा हो जाएगा तो हम ऊंची ऊंची छलांग लगा सकते हैं और jump करके छत को छू सकते हैं। गुरुत्वाकर्षण आधा होने के बाद हमें चीजों को बड़ी आसानी से उठा सकेंगे। एक भारी suitcase या bag के बजाय अब हम दो suitcase आसानी से उठा लेंगे। चीजें अभी के मुकाबले हल्की लगने लगेगी और हल्की चीजें को बड़ी आसानी से move कर सकते हैं। उड़ान भरने के लिए आवश्यक गति तक पहुंचने के लिए विमान को प्राप्त करने के लिए आपको कम बल या ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
दूसरी ओर, वजन कम होने के कारण सूक्ष्म बल (microscopic forces) जो चीजों को खुरदरा और चिपचिपा, घर्षण (friction) पैदा करते हैं, यह सूक्ष्म बल weak हो जाएगा। सूक्ष्म बल कमजोर होने की वजह से slippery यानी फिसलन वाली सतहों पर चलना मुश्किल हो जाएगा और तेज़ हवा पत्तियों, vehicles और दूसरे हल्की चीजों को बड़ी आसानी से उड़ा देगी।
गुरुत्वाकर्षण बल आधा होने के बाद हवा हल्की हो जाएगी। हवा का दबाव (air pressure) भी अभी के मुकाबले आधे से कम हो जाएगी, जो कि अभी के मुकाबले 5,000 meter से अधिक की ऊंचाई पर जो air pressure होता है उसके बराबर हो जाएगी। हवा का दबाव काम होने की वजह से हमें पर्याप्त oxygen में सांस लेने में मुश्किल होने लगेगी, जैसे की किसी mountain की छोटी पर होता है।
गुरुत्वाकर्षण काम होने के बाद पृथ्वी moon अब कम force से अपनी तरफ pull करेगा, और जिसकी वजह से पृथ्वी और चंद्रमा एक दूसरे के चारों ओर काम speed से घूमेंगे। इन सब की वजह से पृथ्वी पर मौजूद समुन्द्रो में ज्वार (tides) कम हो जाएगा, जिसका अर्थ है कि समुन्द्रो में पानी का स्तर न ज्यादा बढ़ेगा और न ही गिरेगा जितना की अभी समुन्द्रो में होता हैं।
चन्द्रमा की तरह, सूर्य भी पृथ्वी को अब कम force of attraction से अपनी ओर खींचेगा। सूर्य और पृथ्वी के बिच खिंचाव (force of attraction) काम होने की वजह से पृथ्वी अब सूर्य के चारों ओर अपनी orbit में उतनी speed नहीं घूमेगी जितने speed से वो अभी घूमती है। पृथ्वी का कक्षीय गति (orbital speed) काम होने की वजह से अब पृथ्वी को सूर्य का एक चक्कर complete करने में 365 दिन के बजाय 517 दिन लगेंगे, मतलब अब एक साल में 365 दिन की जगह 517 दिन होंगे।
अगर पृथ्वी अपना गुरुत्वाकर्षण खो दे तो क्या होगा?
यदि पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण (gravity) अचानक से गायब हो जाता है, तो पृथ्वी पर रहने वाले सभी animals, हम इंसान और इंसानो द्वारा बनाए सभी objects अब जमीन पर ना तो खड़े हो पाएंगे और ना ही चल पाएंगे। हम सब जमीन पर रहने की ताकत को खो देंगे। पृथ्वी के motion पर इसका कोई असर नहीं पाएगा, वो पहले की तरह घूमती रहेगी, लेकिन हम सब पृथ्वी के साथ नहीं चल पाएंगे, आगे चलने के बजाय हम एक straight line में ऊपर की ओर बढ़ने। पृथ्वी के surface के साथ जो भी चीजे जुडी नहीं होंगी वह सभी जमीन से ऊपर की ओर बढ़ने लगेंगी और अंतरिक्ष (universe) में चली जाएंगी।
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण चले जाने के बाद इससे केवल solid objects पर ही प्रभाव नहीं होगा बल्कि पृथ्वी पर मौजूद gases पर भी पड़ेगा। Solid objects के साथ साथ पृथ्वी की वायुमंडल (atmosphere) में मौजूद सभी gases भी अंतरिक्ष में चली जाएंगी। पृथ्वी के atmosphere में सांस लेने के लिए अब oxygen भी नहीं बचेगी। पृथ्वी पर कुछ इमारतों में हवा की supply कुछ देर के लिए हो सकती है, लेकिन वह भी कुछ समय बाद अंतरिक्ष में चली जाएगी।
पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण ख़त्म होने के बाद Earth पर मौजूद तरल पदार्थ (Liquids) भी पृथ्वी की surface को छोड़ देंगे। गुरुत्वाकर्षण के बिना हमारे ग्रह (planet) के नदियों, झीलों और समुद्रों में मौजूद सारा पानी पृथ्वी के सतह से ऊपर उठ कर तैरने लगेंगी और वैज्ञानिकों का यह मानना है की शुरुआत में water शायद बड़े बड़े बूँदों के रूप में तैरेंगी।
पृथ्वी का atmosphere गायब होने के बाद पृथ्वी का तापमान (temperature) भी तेजी से बढ़ना शुरू हो जाएगा। पृथ्वी का वायुमंडल ख़त्म होने के बाद अब पृथ्वी पर रहने वाले जीवन को सूर्य की गर्मी और ultraviolet radiations से सुरक्षा नहीं मिल पाएगा। पृथ्वी पर गर्मी इतनी बढ़ जाएगी की rivers और oceans में मौजूद सारा पानी vapor यानी भाप बन जाएगा और अंतरिक्ष में उड़ जाएगा।
वैज्ञानिक केवल prediction यानी भविष्यवाणी या अनुमान लगा सकते हैं कि यदि अचानक पृथ्वी अपना gravity खो दे तो क्या होगा। वैज्ञानिक universe में जाने के बाद "अंतरिक्ष यात्रियों के साथ क्या होता है" उसका study और जाँच पड़ताल करने के बाद हमे इसका एक छोटा सा clue यानी संकेत दे सकते हैं कि gravity ना होने की वजह से हमारे body पर क्या प्रभाव पड़ सकता है। शुरू में अंतरिक्ष यात्री अपने अभिविन्यास (orientation) की भावना भी खो देते हैं। इससे astronauts यानी अंतरिक्ष यात्रियों कुछ समय के लिए खुद को बीमार महसूस कर सकते हैं।
अंतरिक्ष में astronauts यानी अंतरिक्ष यात्रियों को ऐसा भी महसूस करते हैं कि जैसे उनके हाथ और पैर उनके body से अलग हो गए हो। हवा के दबाव (air pressure) में परिवर्तन की वजह से कई बार उनकी vision यानी दृष्टि पर भी प्रभाव पड़ता है, ऐसा सायद eye ball, मस्तिष्क और spinal fluid यानी रीढ़ की हड्डी के तरल पदार्थ पर air pressure में परिवर्तन के कारण हो सकता है। उनके शरीर पर वजन कम होने के कारण उनकी muscles और bones कमजोर होने लगती हैं, और इससे बचने के लिए astronauts अंतरिक्ष यान में अपना ज्यादा तर समय व्यायाम करने में लगाते हैं।
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